ईरान तनाव से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर, भारत में महंगाई बढ़ने की आशंका: प्रो. अरुण कुमार

रायपुर।
देश-दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, खासकर ईरान से जुड़े हालात, वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं और इसका असर भारत पर भी पड़ना तय है। जाने-माने अर्थशास्त्री प्रोफेसर अरुण कुमार ने कहा कि यदि यह टकराव जल्द खत्म नहीं हुआ तो तेल आपूर्ति, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर दबाव पड़ेगा, जिससे भारत में महंगाई बढ़ सकती है।

वे राजधानी में रोटरी क्लब ऑफ रायपुर हेरिटेज द्वारा आयोजित व्याख्यान में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने डिजिटल अर्थव्यवस्था, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), रोजगार, नोटबंदी और जीडीपी वृद्धि जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से अपनी राय रखी।

🔹 आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है

प्रो. कुमार ने कहा कि ईरान से जुड़े घटनाक्रम और ऑयल इंडस्ट्री पर हमलों के कारण समुद्री व्यापार मार्ग प्रभावित हो रहे हैं, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन पर असर पड़ रहा है। जहां पहले प्रतिदिन लगभग 100 जहाज गुजरते थे, वहां अब बहुत कम जहाज निकल पा रहे हैं। यदि स्थिति दो-तीन सप्ताह और बनी रही तो आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है।

उन्होंने कहा कि इसका असर भारत के टेक्सटाइल और एक्सपोर्ट सेक्टर पर भी पड़ सकता है।

🔹 डिजिटल और एआई से रोजगार की चुनौती

तकनीक और एआई के तेजी से बढ़ते उपयोग पर उन्होंने कहा कि इससे रोजगार के स्वरूप में बड़ा बदलाव आ रहा है। बड़ी आईटी कंपनियां कर्मचारियों की संख्या कम कर रही हैं क्योंकि एआई के कारण काम की उत्पादकता बढ़ गई है।

उन्होंने कहा कि पहले तकनीकी बदलाव से मुख्य रूप से मैनुअल लेबर प्रभावित होता था, लेकिन अब स्किल्ड वर्कर्स भी प्रभावित हो रहे हैं। कॉल सेंटर और बीपीओ जैसे क्षेत्रों में भविष्य में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

🔹 नोटबंदी से काला धन खत्म नहीं हुआ

नोटबंदी पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह कदम पूरी तरह सफल नहीं रहा। काला धन केवल नकदी के रूप में नहीं होता, बल्कि अंडर-इनवॉइसिंग, ओवर-इनवॉइसिंग और संपत्तियों के गलत मूल्यांकन जैसे तरीकों से भी उत्पन्न होता है।

उन्होंने बताया कि रिजर्व बैंक के अनुसार लगभग 99.3 प्रतिशत नकदी वापस बैंकिंग सिस्टम में आ गई थी, जिससे स्पष्ट है कि केवल नकदी हटाने से काले धन की समस्या समाप्त नहीं होती।

🔹 जीडीपी बढ़ी, लेकिन असमानता भी

भारत की आर्थिक वृद्धि पर उन्होंने कहा कि देश में संगठित और असंगठित दो तरह की अर्थव्यवस्था है। संगठित क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है, जबकि असंगठित क्षेत्र कमजोर हो रहा है। नोटबंदी के बाद मांग का बड़ा हिस्सा असंगठित क्षेत्र से संगठित क्षेत्र में स्थानांतरित हुआ है, जिससे असमानता बढ़ने की स्थिति बनी है।

🔹 एमएसपी और कृषि नीति पर भी चर्चा

व्याख्यान में प्रो. कुमार ने कृषि, मजदूरी और अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी विचार रखे। उन्होंने कहा कि देश में 23 फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) घोषित होता है, लेकिन प्रभावी क्रियान्वयन केवल कुछ फसलों—जैसे गन्ना, गेहूं और धान—में ही होता है। इससे अन्य फसलों का उत्पादन प्रभावित होता है।

उन्होंने किसानों और मजदूरों के बीच बेहतर समन्वय, शिक्षा, स्वास्थ्य, रिसर्च और रोजगार के क्षेत्र में बड़े बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया।

🔹 बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी रहे मौजूद

कार्यक्रम में रोटरी क्लब ऑफ रायपुर हेरिटेज के संयोजक सनत जैन, अध्यक्ष पंकज शर्मा, पूर्व अध्यक्ष महेंद्र कश्यप, उप संयोजक राजेंद्र जैन, रविवि के प्रोफेसर आर.के. ब्रम्हे, पूर्व नौकरशाह सुशील त्रिवेदी, इंदिरा मिश्र, एस.के. मिश्रा तथा ललित सिंघानिया सहित बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी उपस्थित रहे।

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