भारत-अमेरिका समझौते से बदले समीकरण’ 50% से घटकर 18% हुआ भारतीय सामान पर टैक्स
नई दिल्ली/वाशिंगटन: भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव अब खत्म होने की कगार पर है। शुक्रवार (6 फरवरी 2026) को दोनों देशों ने अंतरिम व्यापार समझौते (ITA) का फ्रेमवर्क जारी किया। इस समझौते के लागू होते ही अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगने वाले भारी टैक्स (टैरिफ) को आधा से भी कम कर दिया है।
प्रमुख घोषणाएं और बदलाव:
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टैरिफ में भारी कटौती: भारतीय उत्पादों पर अब 50% के बजाय केवल 18% रेसिप्रोकल टैरिफ लगेगा।
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रूस वाला एक्स्ट्रा टैक्स खत्म: रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर लगाया गया 25% अतिरिक्त दंडात्मक शुल्क (Punitive Tax) तत्काल प्रभाव से हटा लिया गया है।
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विशाल बाजार की पहुंच: भारतीय निर्यातकों, MSMEs और किसानों के लिए अमेरिका का 30 लाख करोड़ डॉलर ($30 Trillion) का बाजार खुल गया है।
500 अरब डॉलर की महा-खरीद (Mega Purchase)
इस समझौते के तहत भारत ने अगले 5 वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर ($500 Billion) मूल्य का सामान खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। इसमें शामिल मुख्य वस्तुएं हैं:
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ऊर्जा उत्पाद: अमेरिका से कच्चे तेल और गैस की खरीद में बढ़ोतरी।
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विमान: बोइंग जैसे अमेरिकी विमानों और उनके कल-पुर्जों का बड़ा ऑर्डर।
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टेक्नोलॉजी: हाई-एंड टेक प्रोडक्ट्स और डेटा सेंटर उपकरण।
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बहुमूल्य धातुएं और कोयला: कोकिंग कोल और अन्य धातुओं का आयात।
किन भारतीय उद्योगों को होगा सबसे ज्यादा फायदा?
टैक्स घटने से भारत के वे सेक्टर जो कम मार्जिन पर काम करते हैं, अब वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे:
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टेक्सटाइल और परिधान: कपड़ों के निर्यात में बड़ी उछाल की उम्मीद।
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फार्मास्यूटिकल्स: जेनेरिक दवाओं के लिए अमेरिकी बाजार आसान होगा।
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हस्तशिल्प और रत्न-आभूषण: भारतीय कारीगरों के उत्पादों पर शुल्क कम होगा।
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चमड़ा और फुटवियर: निर्यात के नए अवसर खुलेंगे।
रणनीतिक महत्व
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता केवल व्यापार नहीं, बल्कि चीन के खिलाफ एक मजबूत इकोनॉमिक ब्लॉक बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। भारत अब वियतनाम, बांग्लादेश और चीन जैसे देशों की तुलना में अमेरिकी बाजार में बेहतर स्थिति में आ गया है।
वाणिज्य मंत्री का बयान: “यह समझौता ‘मेक इन इंडिया’ को वैश्विक मंच पर नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा और युवाओं के लिए लाखों नए रोजगार पैदा करेगा।”









