बजट में कार चाहिए? बैंक नीलामी बन सकती है सस्ता विकल्प: CWM Preeti Agarwal

नई कारों के बढ़ते दाम और सेकंड हैंड कारों की ऊंची मांग के बीच अब कई लोग बैंक द्वारा जब्त की गई गाड़ियों की नीलामी की ओर रुख कर रहे हैं। इन नीलामियों में कारें और टू-व्हीलर अक्सर मार्केट रेट से काफी कम कीमत पर मिल जाते हैं, कई बार तो सामान्य कीमत के लगभग आधे दाम पर भी वाहन मिल सकता है। ज्यादातर बैंक अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए नीलामी कर रहे हैं, जिससे प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी, सुलभ और प्रतिस्पर्धी हो गई है।

बैंक-सीज्ड कारें क्या होती हैं?

जब कोई ग्राहक अपनी कार या टू-व्हीलर की EMI समय पर नहीं चुकाता, तो बैंक या NBFC को वाहन को जब्त करने और बकाया लोन की रिकवरी के लिए उसे नीलामी में बेचने का अधिकार होता है। ऐसे कई वाहन अच्छी रनिंग कंडीशन में होते हैं और EMI रुकने तक उनकी सर्विसिंग व मेंटेनेंस सामान्य रूप से होती रहती है। जब बैंक इन्हें नीलाम करता है तो कोई भी इच्छुक खरीदार तय नियमों के तहत बोली लगाकर इसमें हिस्सा ले सकता है।

बैंक का उद्देश्य इनमें मुनाफा कमाना नहीं बल्कि बकाया लोन की वसूली करना होता है, इसी कारण इन वाहनों की आरक्षित (रिजर्व) कीमत आम सेकंड हैंड कार बाजार की तुलना में कम रखी जाती है। यही कारण है कि कम बजट वाले खरीदारों के लिए ये नीलामियां आकर्षक साबित हो रही हैं।

ऑनलाइन नीलामी क्यों लोकप्रिय हो रही है?

डिजिटल प्लेटफॉर्म आने से बैंक नीलामियों में बिचौलियों की भूमिका कम हुई है और आम खरीदार के लिए पूरा सिस्टम आसान हुआ है। अब खरीदार देशभर की सैकड़ों लिस्टिंग एक ही जगह देख सकते हैं, गाड़ी के मॉडल, साल, फ्यूल टाइप और शहर के हिसाब से फिल्टर लगा सकते हैं और सीधे बैंक द्वारा अपलोड की गई डिटेल्स देख सकते हैं। ऑनलाइन बोली लगाने पर एजेंट कमीशन देना नहीं पड़ता और नीलामी की पूरी प्रक्रिया रियल टाइम में स्क्रीन पर दिखाई देती है, जिससे पारदर्शिता बढ़ती है।

Foreclosureindia, eAuction India, Autobse और Bankeauctions.com जैसे प्लेटफॉर्म पर कई बैंक अपनी जब्त गाड़ियों की नीलामी सूची जारी करते हैं। इन साइटों पर रिजर्व प्राइस, वाहन की लोकेशन, निरीक्षण की तारीख और जरूरी डॉक्यूमेंट की जानकारी भी दी जाती है, जिससे खरीदार पहले से तैयारी कर सके।

कैसे खरीदें बैंक-सीज्ड कार? स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया

सबसे पहले किसी विश्वसनीय ऑनलाइन पोर्टल या बैंक की नीलामी सूचना वाले प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर करें और अपने क्षेत्र व बजट के हिसाब से लिस्टिंग चुनें। नीलामी नोटिस को ध्यान से पढ़ना जरूरी है, जिसमें रिजर्व प्राइस, वाहन की हालत, जहां गाड़ी खड़ी है उस यार्ड का पता, और उपलब्ध डॉक्यूमेंट जैसे RC, NOC, इत्यादि की जानकारी होती है। बोली लगाने से पहले उसी मॉडल की सेकंड हैंड कार का बाजार रेट आम पोर्टलों पर देखकर अपना अधिकतम बजट तय कर लेना समझदारी है।

अगले चरण में, बैंक द्वारा तय तारीख पर वाहन का फिजिकल निरीक्षण किया जा सकता है, हालांकि आमतौर पर टेस्ट ड्राइव की अनुमति नहीं होती। ऐसे में इंजन की आवाज और लीक, टायरों की हालत, इंटीरियर, बॉडी पर डेंट या जंग, और यदि उपलब्ध हो तो सर्विस तथा इंश्योरेंस हिस्ट्री की जांच करनी चाहिए। बेहतर होगा कि भरोसेमंद मैकेनिक को साथ ले जाकर गाड़ी की वास्तविक हालत का अंदाजा लिया जाए ताकि बाद में रिपेयर की अतिरिक्त लागत का अनुमान पहले से हो सके।

ऑनलाइन नीलामी में हिस्सा लेने के लिए KYC डॉक्यूमेंट के साथ प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन कर Earnest Money Deposit (EMD) जमा करना होता है, जो आमतौर पर रिजर्व प्राइस का एक हिस्सा होता है। यदि आपकी बोली सफल नहीं होती तो यह राशि वापस कर दी जाती है। नीलामी के दिन इंटरनेट कनेक्शन स्थिर रखना, पहले से तय अधिकतम कीमत पर टिके रहना और आखिरी मिनट की तेज बोली के दौरान शांत रहकर निर्णय लेना महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई बार उत्साह में ज्यादा बोली लगाने से बजट बिगड़ सकता है।

यदि आप नीलामी जीत जाते हैं तो बैंक तय समय सीमा के भीतर (अक्सर 7–15 दिन) पूरी राशि जमा करने के लिए कहता है, समय पर भुगतान न करने पर नीलामी रद्द भी हो सकती है और EMD जोखिम में पड़ सकता है। भुगतान के बाद बैंक आपको सेल सर्टिफिकेट, NOC, इनवॉइस और Form 35 जैसे दस्तावेज उपलब्ध कराता है, जिनकी मदद से आप स्थानीय RTO में जाकर वाहन अपने नाम ट्रांसफर करा सकते हैं। ट्रांसफर प्रक्रिया पूरी होते ही वाहन आधिकारिक रूप से आपके नाम हो जाता है।

पहली बार खरीदने वालों के लिए जरूरी सावधानियां

जो लोग पहली बार बैंक नीलामी से गाड़ी खरीद रहे हैं, उनके लिए कुछ अतिरिक्त सावधानियां जरूरी हैं। सबसे पहले, जिस वाहन पर नजर है, उसकी मार्केट वैल्यू और समान मॉडल की सामान्य सेकंड हैंड कीमत अच्छी तरह रिसर्च करें, ताकि रिजर्व प्राइस और अपनी अधिकतम बोली का स्तर वास्तविक हो। दूसरे, वाहन पर कोई लंबित चालान, टैक्स बकाया या कानूनी विवाद तो नहीं है, इसका भी यथासंभव पता लगाएं।

बैंक से मिले डॉक्यूमेंट को ध्यान से मिलाएँ और यदि कोई कागज अधूरा लगे तो पहले ही स्पष्टता मांगें, क्योंकि RTO ट्रांसफर के समय ये दस्तावेज अहम होते हैं। नीलामी में सफल होने के बाद जल्दी भुगतान की आवश्यकता होती है, इसलिए पहले से पर्याप्त फंड की व्यवस्था रखना समझदारी है। अंत में, बोली के दौरान ज्यादा आकर्षक दिखने वाले ‘बहुत सस्ते सौदों’ के लालच में बिना वाहन की स्थिति और कागजों की जांच किए जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना चाहिए।

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