छत्तीसगढ़ की जेलों में अब भी चल रहे पुराने 2G जैमर — क्या वाकई सुरक्षा का भरोसा है?

रायपुर। तकनीक के तेज़ी से बदलते इस युग में जब पूरा देश 4G से आगे बढ़कर 5G नेटवर्क की ओर अग्रसर हो चुका है, तब भी छत्तीसगढ़ की जेलों में लगे मोबाइल जैमर अब भी 2G तकनीक पर आधारित हैं। यह न केवल पुरानी व्यवस्था का प्रतीक है बल्कि सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।

जेल प्रशासन द्वारा लगाए गए ये 2G जैमर उस समय प्रभावी थे जब मोबाइल नेटवर्क 2G तक सीमित था, लेकिन अब अधिकतर मोबाइल सेवाएँ 4G और 5G पर चल रही हैं। ऐसे में यह तकनीक जेल के भीतर मोबाइल सिग्नल को रोकने में लगभग असफल साबित हो रही है।

सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने जैमर से अब केवल “नाम मात्र” का नियंत्रण रह गया है। क़ैदियों द्वारा मोबाइल फ़ोन का प्रयोग, इंटरनेट एक्सेस और सोशल मीडिया पर सक्रियता जैसी घटनाएँ समय-समय पर सामने आती रहती हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि तकनीकी रूप से जेल सुरक्षा अब भी कमजोर है।

सूत्रों के अनुसार, प्रदेश की कई जेलों में यह समस्या समान रूप से मौजूद है। वहीं, सरकार और जेल विभाग को अब 4G और 5G समर्थित आधुनिक जैमर सिस्टम लगाने की दिशा में कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि सुरक्षा तंत्र वास्तव में प्रभावी हो सके।

राज्य के जानकारों का कहना है कि तकनीकी उन्नयन केवल आधुनिकता का प्रतीक नहीं, बल्कि आंतरिक सुरक्षा और प्रशासनिक नियंत्रण के लिए अत्यंत आवश्यक है। समय के साथ अपडेट न होना न केवल संसाधनों की बर्बादी है बल्कि सुरक्षा जोखिम भी बढ़ाता है।

अब समय है कि छत्तीसगढ़ सरकार जेलों में तकनीकी सुधार की दिशा में त्वरित कदम उठाए, ताकि बदलते दौर के साथ जेल सुरक्षा भी मज़बूत और आधुनिक बन सके।

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