“उपभोक्ता को लूटने की नई चाल – बड़ी कंपनियों की कीमतों की मनमानी पर लगाम कब?”
भारत सरकार ने देश के करोड़ों उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए 28% जीएसटी स्लैब वाले उत्पादों (सीमेंट, टायर आदि) को घटाकर 18% स्लैब में रखा। इसका सीधा मतलब था कि आम आदमी को लगभग 10% की राहत मिलेगी।

लेकिन हकीकत इससे ठीक उलट है। बड़ी-बड़ी कंपनियाँ सरकार के इस फैसले को नाकाम करने में जुट गई हैं। ये कंपनियाँ धीरे-धीरे 2%–5% दाम बढ़ाकर वही कीमत वसूलने की कोशिश कर रही हैं, जितनी पहले जीएसटी की ऊँचाई में छिपी थी। यह उपभोक्ता के साथ सीधी धोखाधड़ी है और सरकार की नीतियों की खुली अवहेलना।
सरकार ने टैक्स कम किया, लेकिन कंपनियाँ अब अपनी जेब भरने के लिए कीमतें बढ़ा रही हैं। सवाल यह है कि – क्या उपभोक्ता हमेशा इन कॉरपोरेट कंपनियों की मनमानी का शिकार बने रहेंगे?
हम भारत सरकार से ज़ोरदार माँग करते हैं कि –
सिर्फ जीएसटी घटाने तक सीमित न रहे,
बल्कि कड़ी निगरानी रखे कि कौन-सी कंपनी अपने प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ाकर उपभोक्ता को लूट रही है।
ऐसी कंपनियों पर भारी दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए ताकि आम जनता को सचमुच राहत मिल सके।
आज देश का उपभोक्ता ठगा महसूस कर रहा है। सरकार का फैसला ऐतिहासिक था, लेकिन कॉरपोरेट मुनाफाखोरों की चालाकियों से उसका असर शून्य हो रहा है। अब समय है कि उपभोक्ता की जेब की सुरक्षा सरकार की पहली प्राथमिकता बने।









