Korba News: कोरबा में जल्द दौड़ेंगी 40 इलेक्ट्रिक बसें, महिलाओं के हाथों में होगी स्टीयरिंग; मिलेगी मुफ्त ड्राइविंग ट्रेनिंग
कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा शहर में जल्द ही इलेक्ट्रिक बस सेवा शुरू होने जा रही है। खास बात यह है कि इन बसों के संचालन में महिलाओं को प्राथमिकता देने की तैयारी की जा रही है। यानी आने वाले दिनों में कोरबा की सड़कों पर ई-बसों की स्टीयरिंग महिलाओं के हाथों में नजर आ सकती है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘पीएम ई-बस सेवा योजना’ के तहत महिलाओं को बस चालक और कंडक्टर के रूप में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की पहल की जा रही है।
इस योजना के तहत कोरबा शहर को कुल 40 इलेक्ट्रिक बसें आवंटित की गई हैं। इनके संचालन के लिए डिपो और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने का काम जारी है। राज्य शहरी विकास एजेंसी के अंतर्गत डिपो निर्माण किया जा रहा है। बस सेवा शुरू होने से शहर में आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा मिलेगा।
40 इलेक्ट्रिक बसों से बदलेगी कोरबा की परिवहन व्यवस्था
कोरबा में 40 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू होने के बाद शहरवासियों को सार्वजनिक परिवहन का नया विकल्प मिलेगा। इलेक्ट्रिक बसें डीजल और पेट्रोल पर निर्भरता कम करने के साथ प्रदूषण नियंत्रण में भी मददगार होंगी। इसके लिए चार्जिंग स्टेशन और बस डिपो जैसी जरूरी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
महिला ड्राइवरों को मिलेगी मुफ्त ड्राइविंग ट्रेनिंग
इस परियोजना की खास बात महिलाओं को रोजगार से जोड़ना है। ई-बसों के संचालन से जुड़ी एजेंसियां और कंपनियां महिला ड्राइवरों को विशेष ड्राइविंग ट्रेनिंग निशुल्क उपलब्ध कराएंगी।
हालांकि, इसके लिए महिलाओं को भारी वाणिज्यिक वाहन चलाने का वैध लाइसेंस और निर्धारित तकनीकी योग्यता व प्रशिक्षण संबंधी शर्तें पूरी करनी होंगी। ड्राइविंग अनुभव भी चयन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण हो सकता है।
डीजल बसों के मुकाबले इलेक्ट्रिक बस चलाना आसान
विशेषज्ञों के मुताबिक, पारंपरिक डीजल बसों की तुलना में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन अपेक्षाकृत आसान होता है। इनमें ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन की सुविधा होती है, जिससे बार-बार गियर बदलने की जरूरत नहीं पड़ती। इसके अलावा डिजिटल डैशबोर्ड के माध्यम से बस के संचालन और नियंत्रण में सुविधा मिलती है।
इसी वजह से इलेक्ट्रिक बसों के संचालन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की संभावनाएं भी देखी जा रही हैं।
भुवनेश्वर, नागपुर और दिल्ली में महिलाएं संभाल रहीं बसों की कमान
सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का मॉडल देश के कई शहरों में पहले से लागू है।
- भुवनेश्वर: ‘मो बस’ सेवा में करीब 40 प्रतिशत कंडक्टर महिलाएं हैं।
- नागपुर: वर्ष 2019 से महिला कर्मचारी ‘तेजस्विनी’ बसों का संचालन कर रही हैं।
- दिल्ली: दिल्ली परिवहन निगम (DTC) में भी महिला कंडक्टर और ड्राइवर सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं।
महिलाओं को रोजगार, शहर को मिलेगा आधुनिक परिवहन
कोरबा में भी इसी मॉडल पर महिलाओं को सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था से जोड़ने की तैयारी है। इससे महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुल सकते हैं। साथ ही इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से शहर की यातायात व्यवस्था अधिक आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल बनाने में मदद मिलेगी।
अब शहरवासियों को कोरबा में 40 इलेक्ट्रिक बसों की शुरुआत और महिला ड्राइवरों की नियुक्ति का इंतजार है।










