रेल पटरी के पास मिला मगरमच्छ का बच्चा, इलाके में दहशत, लोगों से नदी-नाले में नहीं जाने की अपील
कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में मगरमच्छ की मौजूदगी से स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई है। कुसमुंडा क्षेत्र के प्रेम नगर वार्ड क्रमांक 65 स्थित भैरोताल में खोलार नाले के पास रेलवे पटरी के नजदीक मगरमच्छ का एक बच्चा देखा गया। अचानक मगरमच्छ का बच्चा दिखाई देने से आसपास के लोगों में हड़कंप मच गया। इसकी जानकारी मिलते ही इलाके के लोग सतर्क हो गए हैं। स्थानीय लोगों को आशंका है कि आसपास के जलस्रोतों में और भी मगरमच्छ हो सकते हैं।
रेलवे पटरी के पास दिखाई दिया मगरमच्छ का बच्चा
जानकारी के मुताबिक, प्रेम नगर वार्ड 65 के भैरोताल इलाके में खोलार नाला बहता है। इसी नाले के किनारे रेलवे पटरी के पास लोगों की नजर मगरमच्छ के बच्चे पर पड़ी। आबादी वाले क्षेत्र के नजदीक मगरमच्छ दिखाई देने की खबर तेजी से आसपास के मोहल्लों में फैल गई।
मगरमच्छ का बच्चा मिलने के बाद स्थानीय नागरिकों में भय का माहौल है। लोगों को चिंता है कि यदि मगरमच्छ नाले से निकलकर रिहायशी इलाके की ओर आ गया तो किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका बन सकती है।
नाले में और मगरमच्छ होने की आशंका
खोलार नाले के आसपास जलस्रोत और झाड़ियां होने के कारण लोगों को आशंका है कि वहां अन्य मगरमच्छ भी मौजूद हो सकते हैं। खासकर बच्चों और मवेशियों की सुरक्षा को लेकर ग्रामीण और स्थानीय निवासी चिंतित हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नाले के आसपास आवाजाही करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। रेलवे पटरी के आसपास भी अनावश्यक रूप से जाने से बचना चाहिए।
नदी-नाले में नहीं जाने की अपील
मगरमच्छ का बच्चा दिखाई देने के बाद लोगों से नदी, नाले और अन्य जलस्रोतों के आसपास जाने से बचने की अपील की जा रही है। खासकर छोटे बच्चों को अकेले पानी के आसपास नहीं जाने देना चाहिए। मवेशियों को भी नाले में पानी पिलाने या छोड़ने से बचाने की जरूरत है।
वन विभाग से निगरानी और कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों ने वन विभाग से क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने और मगरमच्छ की मौजूदगी की पुष्टि करने की मांग की है। साथ ही लोगों की सुरक्षा को देखते हुए आवश्यक कदम उठाने की अपील की है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, मगरमच्छ को देखकर उसके करीब जाना, उसे पकड़ने या भगाने की कोशिश करना खतरनाक हो सकता है। ऐसे में लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए और इसकी सूचना वन विभाग को देनी चाहिए।










