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Changes to rental rules in Chhattisgarh : छत्तीसगढ़ में किराये के मकान को लेकर नए नियमों की चर्चा, सिक्योरिटी डिपॉजिट से बेदखली तक जानें अहम बातें

Changes to rental rules in Chhattisgarh  रायपुर। छत्तीसगढ़ में मकान और दुकान किराये पर देने तथा लेने से जुड़े नियमों में बदलाव को लेकर चर्चा तेज है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राज्यपाल ने छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण (संशोधन) अधिनियम को मंजूरी दी है। संशोधित प्रावधानों का उद्देश्य मकान मालिकों और किराएदारों के अधिकारों की रक्षा करना, किराये के लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ाना और विवादों को कम करना बताया गया है।

इन प्रावधानों में सुरक्षा निधि, किराये में सालाना बढ़ोतरी, लिखित किरायानामा, आवश्यक सुविधाओं और संपत्ति खाली कराने की प्रक्रिया जैसे विषय शामिल हैं। हालांकि, नियमों की अंतिम व्याख्या और लागू होने की तारीख की पुष्टि आधिकारिक राजपत्र एवं संशोधित अधिनियम से करना जरूरी है।

सिक्योरिटी डिपॉजिट को लेकर क्या है प्रावधान?

उपलब्ध विवरण के अनुसार, संशोधित कानून में मकान मालिक द्वारा किराएदार से ली जाने वाली सुरक्षा निधि यानी सिक्योरिटी डिपॉजिट की अधिकतम सीमा निर्धारित करने का उल्लेख है। इसके तहत अधिकतम तीन महीने के किराये के बराबर सुरक्षा निधि लेने की बात कही गई है।

इसके साथ ही किराएदार को लिखित किरायानामे की प्रति और किराये के भुगतान की रसीद प्राप्त करने का अधिकार दिए जाने का उल्लेख है। इससे भुगतान और समझौते की शर्तों को लेकर विवाद होने पर दस्तावेजी प्रमाण उपलब्ध हो सकते हैं।

किराये में सालाना कितनी बढ़ोतरी होगी?

उपलब्ध जानकारी में किराये की वार्षिक वृद्धि के लिए अलग-अलग सीमाओं का उल्लेख किया गया है:

  • 2,000 रुपये तक मासिक किराया: सालाना अधिकतम 5 प्रतिशत वृद्धि।
  • 2,000 रुपये से अधिक मासिक किराया: सालाना अधिकतम 10 प्रतिशत वृद्धि।

इन दरों की लागू होने वाली शर्तों और दायरे की पुष्टि आधिकारिक अधिनियम एवं संबंधित नियमों से की जानी चाहिए। किरायेदारों और मकान मालिकों को केवल इन आंकड़ों के आधार पर अपने समझौते में बदलाव करने से पहले आधिकारिक प्रावधान देखना चाहिए।

बिजली-पानी जैसी जरूरी सुविधाएं बंद करने पर रोक

बताए गए प्रावधानों के अनुसार, किराएदार पर मकान खाली करने का दबाव बनाने के लिए बिजली और पानी जैसी आवश्यक सुविधाएं बंद करने पर रोक का उल्लेख है। मकान मालिक अपनी मर्जी से ताला बदलकर या बुनियादी सेवाओं के कनेक्शन काटकर संपत्ति का कब्जा वापस नहीं ले सकता। इसके लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा।

दूसरी ओर, यदि किराएदार किराया नहीं चुकाता, संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है या किरायानामे की शर्तों का उल्लंघन करता है, तो मकान मालिक संबंधित सक्षम प्राधिकारी के समक्ष बेदखली के लिए आवेदन कर सकता है। ऐसे मामलों में कार्रवाई लागू कानून के अनुसार की जाएगी।

मकान का निरीक्षण और वापस लेने की प्रक्रिया

मकान मालिक किराये पर दी गई संपत्ति का निरीक्षण निर्धारित प्रक्रिया तथा पूर्व सूचना या सहमति से जुड़ी लागू शर्तों का पालन करते हुए कर सकता है। यदि उसे अपने उपयोग के लिए संपत्ति की आवश्यकता है, तो संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत नोटिस देकर मकान वापस मांगा जा सकता है।

किराएदार को भी किरायानामे की शर्तों और सक्षम प्राधिकारी के वैध आदेशों का पालन करना होगा। समझौता समाप्त होने या कानूनी आदेश जारी होने की स्थिति में संपत्ति खाली करने की प्रक्रिया लागू कानून के अनुसार पूरी की जाएगी।

मकान मालिक और किराएदार के बीच विवाद होने पर क्या करें?

किराया, सुरक्षा निधि, मरम्मत, रखरखाव या मकान खाली कराने को लेकर विवाद होने पर संबंधित सक्षम प्राधिकारी के समक्ष आवेदन किया जा सकता है। लागू कानूनी व्यवस्था के तहत आदेश से असंतुष्ट पक्ष को अपील करने का विकल्प भी मिल सकता है। संबंधित प्राधिकारी और अपील की प्रक्रिया की पुष्टि आधिकारिक नियमों से की जानी चाहिए।

किरायानामा बनवाते समय इन बातों का रखें ध्यान

कानूनी विवादों से बचने के लिए मकान मालिक और किराएदार को लिखित किरायानामा बनवाना चाहिए। इसमें निम्नलिखित बिंदु स्पष्ट होने चाहिए:

  • मासिक किराया और भुगतान की तारीख।
  • सुरक्षा निधि की राशि और वापसी की शर्तें।
  • मरम्मत एवं रखरखाव की जिम्मेदारी।
  • बिजली-पानी के बिलों के भुगतान की व्यवस्था।
  • किरायानामे की अवधि और मकान खाली करने की शर्तें।

इसके अलावा, किराएदार के पुलिस सत्यापन, किरायानामे के पंजीकरण, स्टाम्प ड्यूटी और पुराने समझौतों पर संशोधित कानून के प्रभाव की जानकारी के लिए आधिकारिक अधिसूचना और स्थानीय प्रशासन के निर्देश देखना उचित होगा।


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