• nagardarpannews

CG News : जंगल में गूंजी मंगलगीत की धुन, हाथी के शावक की छठी पर ग्रामीणों ने पूजा-अर्चना के बाद कराया सामूहिक भोज

CG News : रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में वन्यजीवों के प्रति ग्रामीणों का प्रेम और आस्था देखने को मिली। गणेश चतुर्थी के दिन जंगल में जन्मे हाथी के नन्हे शावक की ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ छठी मनाई। शावक के जन्म के करीब 15 दिन बाद मंगलवार को आयोजित इस अनोखे कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। जंगल की सीमा पर पूजा-अर्चना कर ग्रामीणों ने हाथी के बच्चे के स्वस्थ, सुरक्षित और दीर्घायु जीवन की कामना की। इसके बाद सामूहिक भोज का आयोजन भी किया गया। वन्यजीवों के प्रति ग्रामीणों की इस अनूठी पहल की चर्चा क्षेत्र में हो रही है।

गणेश चतुर्थी के दिन हुआ था हाथी के शावक का जन्म

जानकारी के अनुसार, रायगढ़ जिले के जंगल में गणेश चतुर्थी के दिन एक मादा हाथी ने नन्हे शावक को जन्म दिया था। हाथी के बच्चे के जन्म की खबर मिलने के बाद स्थानीय ग्रामीणों में खुशी का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने इसे शुभ अवसर मानते हुए शावक की छठी मनाने का निर्णय लिया। जन्म के करीब 15 दिन बाद मंगलवार को पारंपरिक तरीके से यह आयोजन किया गया।

CG Crime News : कांग्रेस नेता को लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर धमकी, रंगदारी मामले में शोएब ढेबर समेत 2 गिरफ्तार

जंगल की सीमा पर हुई पूजा-अर्चना

शावक की छठी के अवसर पर ग्रामीण जंगल की सीमा पर एकत्रित हुए। यहां विधि-विधान और पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना की गई। ग्रामीणों ने हाथी के बच्चे के स्वस्थ रहने, सुरक्षित जीवन और जंगल में निर्बाध विचरण की कामना की। इस दौरान ग्रामीणों ने प्रकृति और वन्यजीवों के प्रति अपनी आस्था भी व्यक्त की।

सामूहिक भोज में शामिल हुए ग्रामीण

पूजा-अर्चना के बाद सामूहिक भोज का आयोजन किया गया। इसमें गांव के पुरुषों, महिलाओं और अन्य ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। हाथी के शावक के जन्म की खुशी को साझा करने के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में उत्सव जैसा माहौल रहा। ग्रामीणों ने इसे प्रकृति और वन्यजीवों के साथ अपने जुड़ाव को प्रदर्शित करने का अवसर बताया।

वन्यजीवों के प्रति दिखा अनूठा प्रेम

ग्रामीणों द्वारा हाथी के शावक की छठी मनाना वन्यजीवों के प्रति स्थानीय समुदाय की आस्था और भावनात्मक जुड़ाव का अनोखा उदाहरण है। जंगलों के आसपास रहने वाले ग्रामीणों का वन्यजीवों के साथ लंबे समय से संबंध रहा है। ऐसे आयोजन प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और वन्यजीव संरक्षण के महत्व को भी सामने लाते हैं।

About The Author