चेक बाउंस मामले में न्यायालय का महत्वपूर्ण फैसला, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कुमुदनी गर्ग ने आरोपी को 6 माह के सश्रम कारावास से किया दंडित
कोरबा, 24 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक, शाखा टी.पी. नगर कोरबा द्वारा प्रस्तुत चेक अनादरण के मामले में माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, कोरबा श्रीमती कुमुदनी गर्ग ने महत्वपूर्ण निर्णय पारित करते हुए आरोपी सोहन सिंह को परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के अपराध में दोषसिद्ध किया है।
धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम के तहत दोषसिद्धि
न्यायालय ने अभिलेख पर उपलब्ध मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों के परीक्षण के बाद निष्कर्ष निकाला कि आरोपी द्वारा अपने ऋण/विधिक दायित्व के उन्मोचन के लिए दिया गया चेक अपर्याप्त निधि के कारण अनादरित हुआ तथा परिवादी अपने मामले को युक्तियुक्त संदेह से परे प्रमाणित करने में सफल रहा।
आरोपी को 6 माह का सश्रम कारावास
माननीय न्यायालय ने आरोपी सोहन सिंह को धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम के तहत 6 माह के सश्रम कारावास से दंडित किया है।
₹1,30,000 प्रतिकर/अर्थदंड
निर्णय में परिवादी को हुई मानसिक एवं आर्थिक क्षति, ब्याज एवं अन्य व्यय को दृष्टिगत रखते हुए कुल ₹1,30,000/- प्रतिकर/अर्थदंड निर्धारित किया गया है। राशि का भुगतान निर्धारित अवधि में नहीं किए जाने पर आरोपी को दो माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
परिवादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता धनेश सिंह की पैरवी
इस प्रकरण में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक की ओर से अधिवक्ता श्री धनेश सिंह ने पैरवी की। निर्णय में परिवादी की ओर से उनके अधिवक्ता के रूप में उल्लेख किया गया है।
न्यायालय ने साक्ष्यों एवं विधिक उपधारणाओं को माना महत्वपूर्ण
न्यायालय ने परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 118 एवं 139 के अंतर्गत उत्पन्न विधिक उपधारणाओं तथा प्रस्तुत साक्ष्यों का परीक्षण करते हुए माना कि आरोपी इन उपधारणाओं का खंडन करने में सफल नहीं रहा। साथ ही न्यायालय ने चेक, अनादरण मेमो, विधिक सूचना तथा डाक रसीद सहित प्रस्तुत दस्तावेजों का भी परीक्षण किया।
निर्णय दिनांक 24 सितंबर 2026
यह निर्णय दिनांक 24 सितंबर 2026 को खुले न्यायालय में घोषित किया गया।
न्यायालय: न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, कोरबा
माननीय न्यायाधीश: श्रीमती कुमुदनी गर्ग
प्रकरण: छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक विरुद्ध सोहन सिंह
अपराध: धारा 138, परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881
सजा: 6 माह सश्रम कारावास
प्रतिकर/अर्थदंड: ₹1,30,000/-
परिवादी पक्ष के अधिवक्ता — श्री धनेश सिंह, अधिवक्ता, कोरबा










