Korba News: जटराज के ग्रामीणों का विरोध, बसाहट और सुविधाएं मिलने तक मकान तोड़ने पर रोक की मांग
कोरबा। एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम जटराज के ग्रामीणों ने भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास से जुड़ी समस्याओं को लेकर जिला प्रशासन, राजस्व अधिकारियों और एसईसीएल प्रबंधन को ज्ञापन सौंपा है। ग्रामीणों ने बसाहट में पूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने, मुआवजा राशि से संबंधित कार्रवाई रोकने और समस्याओं का निराकरण होने तक मकानों को बलपूर्वक ध्वस्त कर बेदखली पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम जटराज की जमीन का अधिग्रहण एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र द्वारा चार चरणों में किया गया। इनमें वर्ष 1978-79, 1983, 1984 और 2010 में किए गए अधिग्रहण शामिल हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शुरुआती तीन चरणों में आवास प्रभावित नहीं हुए थे, जबकि वर्ष 2010 के अधिग्रहण में कई परिवारों के आवास प्रभावित हुए हैं।
16 साल बाद शुरू हुई बसाहट की प्रक्रिया
ज्ञापन में ग्रामीणों ने दावा किया है कि वर्ष 2010 के अधिग्रहण के करीब 16 साल बाद अगस्त-सितंबर 2026 में बसाहट आवंटन की प्रक्रिया शुरू की गई है। उनका आरोप है कि कई परिवारों को अभी तक प्लाट आवंटित नहीं हुए हैं, जबकि मकान खाली करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।
ग्रामीणों ने कहा कि वर्ष 2016 से जिला प्रशासन के समक्ष लगातार बसाहट की मांग की जाती रही है। उनका आरोप है कि अब जल्दबाजी में प्लाट आवंटित कर गांव खाली कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
करीब 240 खातेदारों को बसाहट देने की मांग
ग्रामीणों ने ज्ञापन में दावा किया है कि वर्ष 1978, 1983 और 1984 के अधिग्रहण से जुड़े करीब 240 भू-स्वामियों को अभी तक रोजगार या बसाहट का लाभ नहीं मिला है। उन्होंने प्रभावित परिवारों को आवासहीन होने से बचाने के लिए प्रत्येक बालिग सदस्य को 6 डिसमिल बसाहट देने की मांग रखी है।
ग्रामीणों का कहना है कि कुछ लोगों को पूर्व में रोजगार तो मिला, लेकिन उन्हें अब तक बसाहट उपलब्ध नहीं कराई गई है।
मापन की पावती और रिकॉर्ड की पारदर्शिता पर सवाल
ग्रामीणों ने मकानों और परिसंपत्तियों के मापन को लेकर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि मापन के दौरान भू-स्वामियों को पावती उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे रिकॉर्ड में गड़बड़ी की आशंका बनी हुई है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि जिन मकान मालिकों को मापन से आपत्ति है, उन्हें मापन एवं गणना पत्रक उपलब्ध कराया जाए और उनकी आपत्तियों का निराकरण किया जाए।
भूमिहीन परिवारों को भी बसाहट देने की मांग
ज्ञापन में ग्रामीणों ने भूमिहीन परिवारों को बसाहट देने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि पुनर्वास नीति और संबंधित प्रावधानों के तहत भूमिहीन परिवारों को भी बसाहट दिए जाने की व्यवस्था है।
ग्रामीणों के अनुसार, जटराज के कुछ भूमिहीन परिवारों को पूर्व में सर्वमंगला नगर फेस-2 के पास बसाहट आवंटित की गई है। इसी आधार पर उन्होंने अन्य प्रभावित भूमिहीन परिवारों को भी समान रूप से बसाहट देने की मांग की है।
ड्रोन सर्वे को लेकर भी उठाए सवाल
ग्रामीणों ने 28 मई 2023 को किए गए ड्रोन सर्वे को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सर्वे की जानकारी सार्वजनिक मुनादी के जरिए नहीं दी गई और यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि परिसंपत्तियों का निर्धारण किस प्रक्रिया के तहत किया गया।
ग्रामीणों ने कहा कि ड्रोन सर्वे को करीब तीन साल हो चुके हैं। इस दौरान कई मकानों की स्थिति बदल सकती है। प्राकृतिक आपदा, ब्लास्टिंग से नुकसान, मकानों के जर्जर होने या परिवार बढ़ने जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए परिसंपत्तियों का दोबारा आकलन करने की मांग की गई है।
एक ही स्थान पर बसाहट देने की मांग
ग्रामीणों ने जटराज के परिवारों को अलग-अलग स्थानों पर बसाहट देने के बजाय एक ही स्थान पर पुनर्वासित करने की मांग रखी है। उनका कहना है कि अलग-अलग स्थानों पर बसाने से सामाजिक एकता, सांस्कृतिक सौहार्द और सामुदायिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन से मांग की है कि पहले सभी प्रभावित परिवारों की समस्याओं का निराकरण किया जाए, बसाहट स्थल पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं और इसके बाद ही मकान खाली कराने या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाए।










