चंद मिनटों की बारिश ने खोली नगर निगम की पोल, घंटाघर क्षेत्र में सड़क पर बहता दिखा नाली का गंदा पानी

कोरबा। कोरबा शहर में शनिवार, 20 सितंबर 2026 की शाम हुई महज कुछ मिनटों की बारिश ने नगर निगम की जल निकासी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। शहर के प्रमुख घंटाघर क्षेत्र में एक कॉम्प्लेक्स के सामने की तस्वीरें इस बात का उदाहरण हैं कि बारिश का पानी और नाली का गंदा पानी किस तरह सड़क पर बहता नजर आया।

मौके की तस्वीरों में सड़क के किनारे पानी भरा हुआ दिखाई दे रहा है। नाली से निकलता पानी सड़क की ओर बहता नजर आ रहा है, जबकि आसपास पैदल चलने वाले लोगों और वाहन चालकों को इसी जलभराव के बीच से गुजरना पड़ रहा है। तस्वीरों पर दर्ज समय शाम लगभग 4:31 बजे का है।

चंद मिनटों की बारिश और यह हाल…

सवाल यह है कि जब बारिश कुछ ही मिनटों की थी, तब शहर के एक प्रमुख और व्यस्त इलाके में जल निकासी की यह स्थिति क्यों बनी?

घंटाघर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में यदि नाली का पानी अपने निर्धारित निकास तक पहुंचने के बजाय सड़क पर बहने लगे और आसपास जलभराव होने लगे, तो यह केवल बारिश का मामला नहीं रह जाता, बल्कि ड्रेनेज प्लानिंग, नालियों की सफाई और उनके अंतिम निकास की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि नाली का अंतिम छोर आखिर कहां है?
क्या इसे किसी बड़े नाले या उचित आउटलेट से जोड़ा गया है? यदि जोड़ा गया है, तो कुछ मिनट की बारिश में पानी वापस सड़क पर क्यों दिखाई दे रहा है?

इंजीनियरिंग डिजाइन पर भी सवाल

कोरबा की जनता का सीधा सवाल है—यदि ऊंचाई वाले हिस्से से पानी नीचे की ओर बहता है, तो शहर की नालियों का डिजाइन इस प्राकृतिक बहाव को ध्यान में रखकर क्यों नहीं बनाया गया?

क्या संबंधित इंजीनियरों ने यह सुनिश्चित किया कि नालियों का पानी पर्याप्त क्षमता वाले मुख्य नाले अथवा उचित आउटलेट तक पहुंचे?

जनता का सवाल सीधा है—जिस ड्रेनेज सिस्टम को शहर के लोगों के पैसे से बनाया गया है, क्या उसके डिजाइन और जल निकासी की क्षमता का वास्तविक बारिश के दौरान परीक्षण किया गया था?

मानसून में क्या होता होगा?

जब कुछ मिनटों की बारिश में यह स्थिति सामने आ रही है, तब लंबे समय तक होने वाली तेज बारिश में निचले इलाकों और सड़क किनारे स्थित दुकानों एवं मकानों पर इसका क्या प्रभाव पड़ता होगा, यह चिंता का विषय है।

घंटाघर की यह तस्वीर सिर्फ एक स्थान की स्थिति को सामने रखती है। यदि शहर के अन्य हिस्सों में भी ऐसी समस्याएं हैं, तो नगर निगम को इसका व्यापक सर्वे कराकर जल निकासी व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए।

स्वच्छ कोरबा के दावों पर भी सवाल

एक तरफ शहर को स्वच्छ और बेहतर बनाने के लिए विभिन्न अभियान चलाए जाते हैं और नागरिकों से स्वच्छता में भागीदारी की अपील की जाती है। दूसरी तरफ बारिश के बाद यदि नालियों का गंदा पानी सड़क पर ही बहता दिखाई दे, तो स्वच्छता व्यवस्था की जमीनी स्थिति पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों को यह देखना होगा कि नालियां केवल साफ हैं या उनका पानी वास्तव में सही स्थान तक पहुंच भी रहा है।

क्योंकि केवल नाली की सफाई कर देना पर्याप्त नहीं है।
नाली का पानी सड़क पर नहीं, अपने निर्धारित आउटलेट तक पहुंचना चाहिए।

पूछता है कोरबा

नगर निगम से जनता के कुछ सीधे सवाल हैं—

घंटाघर क्षेत्र में जल निकासी की ऐसी स्थिति क्यों बनी?

नाली के पानी के लिए निर्धारित अंतिम आउटलेट कहां है?

क्या इस ड्रेनेज सिस्टम की क्षमता की जांच की गई है?

नालियों की नियमित सफाई और डी-सिल्टिंग कब हुई?

बारिश के दौरान जलभराव वाले स्थानों की पहचान कर स्थायी समाधान कब किया जाएगा?

क्या शहर की अन्य नालियों और ड्रेनेज नेटवर्क का भी तकनीकी ऑडिट किया जाएगा?

कोरबा को केवल स्वच्छता के नारों की नहीं, ऐसी ड्रेनेज व्यवस्था की जरूरत है जो बारिश के समय जमीन पर काम करती हुई दिखाई दे।

चंद मिनटों की बारिश ने तस्वीर दिखा दी है।
अब सवाल है—क्या नगर निगम इस तस्वीर को देखकर व्यवस्था बदलेगा?

पूछता है कोरबा।

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