कोरबा में कलेक्टर बने शिक्षक, बच्चों के बीच बैठकर बताया सफलता का मंत्र
कोरबा। प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच कोरबा कलेक्टर का एक अलग और प्रेरणादायक रूप देखने को मिला। कलेक्टर बच्चों के बीच पहुंचे और शिक्षक की भूमिका में नजर आए। उन्होंने बच्चों के साथ बैठकर न केवल बातचीत की, बल्कि उन्हें जीवन में आगे बढ़ने और सफलता हासिल करने के महत्वपूर्ण मंत्र भी बताए।
कार्यक्रम के दौरान कलेक्टर ने बच्चों के बीच सहज और आत्मीय माहौल में संवाद किया। औपचारिकता से दूर बच्चों के साथ बैठकर उन्होंने उनकी पढ़ाई, भविष्य और सपनों से जुड़े सवालों को सुना। बच्चों ने भी खुलकर अपनी जिज्ञासाएं रखीं और अपने भविष्य को लेकर सवाल पूछे।
मेहनत, अनुशासन और लक्ष्य पर दिया जोर
कलेक्टर ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि सफलता पाने के लिए सबसे जरूरी है कि व्यक्ति अपने जीवन में एक स्पष्ट लक्ष्य तय करे। लक्ष्य तय करने के बाद उसे हासिल करने के लिए लगातार मेहनत और अनुशासन के साथ प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने बच्चों को समझाया कि सफलता एक दिन में नहीं मिलती। इसके लिए नियमित पढ़ाई, धैर्य और निरंतर प्रयास की आवश्यकता होती है। असफलता मिलने पर निराश होने के बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए।
बच्चों से पूछा—बड़े होकर क्या बनना चाहते हो?
संवाद के दौरान कलेक्टर ने बच्चों से उनके भविष्य के सपनों के बारे में भी चर्चा की। उन्होंने बच्चों से पूछा कि वे बड़े होकर क्या बनना चाहते हैं और अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए किस तरह तैयारी कर रहे हैं।
बच्चों ने अपने-अपने सपनों और भविष्य की योजनाओं के बारे में बताया। किसी ने डॉक्टर बनने की इच्छा जताई तो किसी ने शिक्षक, पुलिस अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना साझा किया। कलेक्टर ने बच्चों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि हर सपना मेहनत और सही दिशा में प्रयास से पूरा किया जा सकता है।
मोबाइल और सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर भी दी सलाह
बच्चों को पढ़ाई के प्रति प्रेरित करते हुए उन्होंने समय के सही उपयोग पर भी जोर दिया। कलेक्टर ने कहा कि आधुनिक तकनीक और मोबाइल का उपयोग ज्ञान बढ़ाने के लिए किया जा सकता है, लेकिन इसका अनावश्यक इस्तेमाल पढ़ाई और लक्ष्य से भटका सकता है।
उन्होंने बच्चों को समय का महत्व समझाते हुए नियमित दिनचर्या बनाने और पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय देने की सलाह दी।









