CG NEWS : ₹17 करोड़ घोटाले पर सरकार सख्त, तीन लिपिक निलंबित, गिरफ्तारी के विरोध में लिपिक संघ का आंदोलन

CG NEWS : बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में सामने आए ₹17 करोड़ के कथित फर्जी सर्पदंश मुआवजा घोटाले में जांच लगातार तेज होती जा रही है। तहसील कार्यालय के तीन लिपिकों (क्लर्क) की गिरफ्तारी के बाद प्रशासन ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वहीं, मामले में अब भी आठ अन्य कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जाने बाकी हैं। दूसरी ओर, गिरफ्तार कर्मचारियों के समर्थन में लिपिक संघ खुलकर सामने आ गया है और गिरफ्तारी का विरोध करते हुए सामूहिक अवकाश पर जाने की चेतावनी दी है।

तीन क्लर्कों पर गिरी निलंबन की गाज

जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बाद गिरफ्तार किए गए तीनों लिपिकों को प्रशासन ने निलंबित कर दिया है। आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सर्पदंश से मौत के मुआवजे की राशि स्वीकृत कर सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया।

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प्रशासन का कहना है कि जांच में जिन कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई जाएगी, उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

आठ कर्मचारियों के बयान अभी बाकी

जांच अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले में आठ अन्य कर्मचारियों से पूछताछ और उनके बयान दर्ज किए जाने शेष हैं। दस्तावेजों, फाइलों और बैंक लेन-देन की गहन जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित घोटाले में किन-किन लोगों की भूमिका रही।

अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

लिपिक संघ ने जताया विरोध

तीनों कर्मचारियों की गिरफ्तारी और निलंबन के बाद लिपिक संघ ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघ का कहना है कि कर्मचारियों के साथ निष्पक्ष व्यवहार किया जाना चाहिए और जांच पूरी होने से पहले कठोर कार्रवाई उचित नहीं है।

संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर जा सकते हैं। इससे तहसील और अन्य शासकीय कार्यालयों का कामकाज प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

घोटाले की परतें खोल रही जांच

जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित फर्जी सर्पदंश प्रकरणों के जरिए मुआवजा राशि कैसे स्वीकृत हुई और किन प्रक्रियाओं में अनियमितता बरती गई। रिकॉर्ड, स्वीकृति आदेश, बैंक खातों और संबंधित दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि कई मामलों में दस्तावेजों की सत्यता और लाभार्थियों की पहचान की भी जांच की जा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके।

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