कोरबा में चिकित्सा क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि: शिवाय हॉस्पिटल में पहली बार हाईटेक टोटल नी रिप्लेसमेंट (TKR) सफल

कोरबा। कोरबा की स्वास्थ्य सेवाओं में एक नया अध्याय जुड़ गया है। ट्रांसपोर्ट नगर स्थित शिवाय हॉस्पिटल ने शहर में पहली बार अत्याधुनिक टोटल नी रिप्लेसमेंट (TKR) सर्जरी सफलतापूर्वक कर चिकित्सा क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इस सफलता के साथ अब घुटनों के गंभीर दर्द और प्रत्यारोपण के लिए मरीजों को अहमदाबाद, हैदराबाद या अन्य महानगरों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा।

अस्पताल में 70 वर्षीय श्री रामशरण साहू, जो छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी से सेवानिवृत्त हैं, का सफल घुटना प्रत्यारोपण किया गया। लंबे समय से घुटनों के असहनीय दर्द से परेशान श्री साहू अब सर्जरी के बाद तेजी से स्वस्थ हो रहे हैं और बिना असहनीय दर्द के सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं।

इस जटिल सर्जरी में डॉ. दिविक मित्तल के मार्गदर्शन में डॉ. संतोष राठौड़ (एमबीबीएस, एमएस ऑर्थोपेडिक्स) ने अपनी विशेषज्ञता का परिचय दिया। वहीं डॉ. अमन श्रीवास्तव (बीपीटी, एमपीटी) एवं उनकी फिजियोथेरेपी टीम ने ऑपरेशन के बाद मरीज की रिकवरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उपचार के प्रत्येक चरण में आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक पद्धति और व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित की गई।

शिवाय हॉस्पिटल का उद्देश्य केवल सफल सर्जरी करना ही नहीं, बल्कि कोरबा और आसपास के लोगों को उनके अपने शहर में महानगरों जैसी अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। आधुनिक ऑपरेशन थिएटर, उन्नत तकनीक, अनुभवी विशेषज्ञों की टीम और व्यवस्थित पोस्ट-ऑपरेटिव फिजियोथेरेपी के माध्यम से अस्पताल घुटनों एवं जोड़ों से जुड़ी गंभीर समस्याओं का समग्र उपचार प्रदान कर रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय से घुटनों के असहनीय दर्द, ऑस्टियोआर्थराइटिस, घुटनों के घिस जाने, चलने-फिरने या सीढ़ियां चढ़ने में कठिनाई तथा दवाइयों एवं इंजेक्शन से राहत नहीं मिलने वाले मरीजों के लिए टोटल नी रिप्लेसमेंट (TKR) एक प्रभावी विकल्प है। सही समय पर की गई यह सर्जरी मरीज को दर्द से राहत देने के साथ उसकी जीवनशैली को फिर से सामान्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

शिवाय हॉस्पिटल की इस उपलब्धि से कोरबा और आसपास के हजारों मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। अब अत्याधुनिक तकनीक, अनुभवी डॉक्टरों की टीम और अपनापन भरी देखभाल के साथ विश्वस्तरीय घुटना प्रत्यारोपण की सुविधा अपने ही शहर में उपलब्ध है, जिससे मरीजों का समय, धन और अनावश्यक भागदौड़—तीनों की बचत होगी

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