CG BREAKING : सर्पदंश मुआवजा घोटाले की जांच ने पकड़ी रफ्तार, CDR और बैंक खातों से खुलेंगे कई बड़े राज
CG BREAKING : बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित सर्पदंश मुआवजा घोटाले की जांच में नया मोड़ आ गया है। इस मामले के कथित मास्टरमाइंड बताए जा रहे अधिवक्ता श्रवण वस्त्रकार के लकवा (पैरालिसिस) से पीड़ित होने के कारण पुलिस जांच प्रभावित हो गई है। स्वास्थ्य कारणों से पुलिस फिलहाल उनका बयान दर्ज नहीं कर पा रही है, जिससे मामले की जांच की रफ्तार धीमी पड़ गई है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि अधिवक्ता के बयान से पूरे नेटवर्क और घोटाले के कई अहम राज सामने आ सकते थे। ऐसे में अब पुलिस डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है।
तीन थानों की जांच पर पड़ा असर
जानकारी के अनुसार, इस बहुचर्चित मामले की जांच सिटी कोतवाली, तोरवा और कोनी थाना पुलिस संयुक्त रूप से कर रही है। लेकिन कथित मुख्य आरोपी का बयान नहीं हो पाने के कारण जांच में कई महत्वपूर्ण कड़ियां जुड़ नहीं पा रही हैं।
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पुलिस अधिकारियों का कहना है कि स्वास्थ्य कारणों से फिलहाल पूछताछ संभव नहीं है। जैसे ही चिकित्सकीय रूप से अनुमति मिलेगी, आरोपी का बयान दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब कॉल डिटेल और बैंक खातों की हो रही जांच
मुख्य आरोपी से पूछताछ नहीं हो पाने के बाद पुलिस ने जांच की दिशा बदलते हुए कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), बैंक खातों के लेनदेन और डिजिटल दस्तावेजों की गहन जांच शुरू कर दी है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस कथित घोटाले में किन-किन लोगों की भूमिका रही, मुआवजा राशि किन खातों में पहुंची और पूरे नेटवर्क का संचालन किस तरह किया गया। पुलिस को उम्मीद है कि तकनीकी और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर मामले की कई अहम कड़ियां सामने आ सकती हैं।
431 मामलों में 17.24 करोड़ रुपये की सहायता राशि जारी
पुलिस जांच में सामने आया है कि वर्ष 2022 से 2025 के बीच सर्पदंश से मौत के नाम पर 431 मामलों में करीब 17.24 करोड़ रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की गई थी।
आरोप है कि इनमें बड़ी संख्या में ऐसे मामले शामिल थे, जिनमें सामान्य या अन्य कारणों से हुई मौतों को फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से सर्पदंश से हुई मृत्यु दर्शाया गया। इसके बाद आरबीसी 6-4 के तहत प्रति प्रकरण चार-चार लाख रुपये का मुआवजा स्वीकृत कराया गया।
फर्जी दस्तावेजों के जरिए मुआवजा लेने का आरोप
जांच में यह आशंका जताई गई है कि कथित गिरोह ने फर्जी मेडिकल रिपोर्ट, दस्तावेज और अन्य प्रमाण तैयार कर सरकारी मुआवजा हासिल किया। पुलिस अब उन सभी प्रकरणों की दोबारा जांच कर रही है, जिनमें सर्पदंश से मौत का दावा किया गया था।
अधिकारियों का कहना है कि यदि दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा और सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो संबंधित सभी आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।









