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CG High Court News : कथित बांग्लादेशी बताकर डिपोर्ट करने का मामला पहुंचा हाईकोर्ट, सरकारों को नोटिस

CG High Court News : बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। बिलासपुर निवासी एक व्यक्ति को पुलिस द्वारा कथित तौर पर बांग्लादेशी नागरिक बताते हुए डिपोर्ट किए जाने के बाद उसकी पत्नी ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) याचिका दायर की है। याचिका में दावा किया गया है कि डिपोर्ट किए जाने के बाद न तो उसका पति बांग्लादेश पहुंचा और न ही अब तक उसका कोई पता चल सका है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार से विस्तृत जवाब तलब किया है।

पत्नी ने पति की सुरक्षा को लेकर जताई चिंता

याचिका में महिला ने कहा है कि उसके पति को पुलिस ने बांग्लादेशी नागरिक बताते हुए कार्रवाई की थी। इसके बाद से परिवार का उससे कोई संपर्क नहीं हो पाया है। महिला का कहना है कि न तो यह जानकारी दी गई कि उसके पति को किस स्थान पर भेजा गया और न ही यह स्पष्ट किया गया कि वह वास्तव में बांग्लादेश पहुंचा या नहीं। लंबे समय से कोई जानकारी नहीं मिलने के कारण परिवार गहरी चिंता में है।

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बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के जरिए लगाई गुहार

पति का कोई पता नहीं चलने पर महिला ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की। याचिका में अनुरोध किया गया है कि संबंधित एजेंसियों को निर्देश देकर उसके पति का पता लगाया जाए और यदि वह किसी सरकारी अभिरक्षा में है तो उसे न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।

हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से मांगा जवाब

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इसे गंभीर मानते हुए केंद्र सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों से यह स्पष्ट करने को कहा है कि संबंधित व्यक्ति के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई, किस आधार पर उसे बांग्लादेशी माना गया और डिपोर्ट की प्रक्रिया किस प्रकार पूरी की गई।

कानूनी प्रक्रिया पर उठे सवाल

इस मामले ने डिपोर्टेशन की प्रक्रिया और पहचान सत्यापन को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि किसी व्यक्ति को विदेशी नागरिक मानकर देश से बाहर भेजा जाता है, तो उसकी पहचान, दस्तावेज और पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन अत्यंत आवश्यक माना जाता है। याचिका में इन्हीं पहलुओं पर भी सवाल उठाए गए हैं।

फिलहाल हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा है। दोनों पक्षों की ओर से जवाब दाखिल होने के बाद मामले की अगली सुनवाई होगी। इस दौरान न्यायालय यह भी देखेगा कि संबंधित व्यक्ति की वर्तमान स्थिति क्या है और उसके संबंध में अब तक क्या कार्रवाई की गई है।

इस मामले को लेकर कानूनी विशेषज्ञों की भी नजर बनी हुई है, क्योंकि यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता, पहचान सत्यापन और डिपोर्टेशन जैसी महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रियाओं से जुड़ा हुआ है। अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई और सरकार की ओर से पेश किए जाने वाले जवाब पर टिकी हैं।

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