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CG High Court : पूर्व CM भूपेश बघेल समेत कई जनप्रतिनिधियों पर आपराधिक मामले, हाईकोर्ट की स्टेटस रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

CG High Court : बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में वर्ष 2026 की स्टेटस रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित 18 से अधिक वर्तमान और पूर्व सांसदों एवं विधायकों के खिलाफ 20 से अधिक आपराधिक मामले विशेष एमपी-एमएलए अदालतों में लंबित हैं। इन मामलों की सुनवाई नियमित रूप से की जा रही है और पूरी प्रक्रिया पर हाईकोर्ट लगातार निगरानी रखे हुए है, ताकि जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित किया जा सके।

विशेष अदालतों में चल रही सुनवाई

रिपोर्ट के अनुसार जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष एमपी-एमएलए अदालतों में विभिन्न आपराधिक प्रकरण विचाराधीन हैं। इन मामलों में वर्तमान और पूर्व सांसदों तथा विधायकों के विरुद्ध दर्ज प्रकरण शामिल हैं।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप इन मामलों की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है, ताकि किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी न हो और न्यायिक प्रक्रिया तय समय में आगे बढ़े।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन

देशभर में जनप्रतिनिधियों के विरुद्ध लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्टों को समय-समय पर स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने और विशेष अदालतों की कार्यवाही की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भी प्रदेश के लंबित मामलों की अद्यतन स्थिति सार्वजनिक की है।

रिपोर्ट में मामलों की संख्या, सुनवाई की प्रगति और विशेष अदालतों की कार्यप्रणाली का उल्लेख किया गया है। इसका उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना और मामलों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करना है।

रिपोर्ट का मतलब दोष सिद्ध होना नहीं

हाईकोर्ट की रिपोर्ट में जिन जनप्रतिनिधियों के खिलाफ मामले लंबित होने का उल्लेख है, उसका अर्थ यह नहीं है कि वे दोषी सिद्ध हो चुके हैं। ये मामले फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन हैं और अंतिम निर्णय संबंधित अदालतों द्वारा साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर दिया जाएगा।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक किसी मामले में अदालत द्वारा अंतिम निर्णय नहीं दिया जाता, तब तक संबंधित व्यक्ति को कानून की दृष्टि में निर्दोष माना जाता है।

हाईकोर्ट की निगरानी व्यवस्था के तहत विशेष एमपी-एमएलए अदालतों में लंबित मामलों की नियमित समीक्षा की जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अदालतों को सुनवाई में तेजी लाने के लिए आवश्यक निर्देश भी दिए जा रहे हैं।

न्यायपालिका का मानना है कि जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों का शीघ्र और निष्पक्ष निपटारा लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक है। इसी उद्देश्य से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट इन मामलों की प्रगति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

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