CG NEWS : सुरक्षाबलों की बड़ी सफलता’ नारायणपुर-महाराष्ट्र सीमा पर नक्सलियों का खजाना और विस्फोटक जब्त

CG NEWS : नारायणपुर। बस्तर संभाग में नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे ‘सफाई अभियान’ में सुरक्षा बलों को एक और ऐतिहासिक सफलता मिली है। नारायणपुर और महाराष्ट्र की सीमा पर स्थित अबूझमाड़ के जंगलों में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के एक बड़े डंप (गुप्त ठिकाने) का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने माओवादियों द्वारा छुपाकर रखे गए 1 करोड़ रुपये नकद और भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद की है।

सर्च ऑपरेशन के दौरान मिला ‘खजाना’

मिली जानकारी के अनुसार, सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम अबूझमाड़–महाराष्ट्र सीमा पर सर्चिंग ऑपरेशन के लिए निकली थी। इसी दौरान मुखबिर की सूचना और तकनीकी इनपुट के आधार पर संदिग्ध इलाके की घेराबंदी की गई। गहन तलाशी के बाद जमीन के नीचे दबाकर रखे गए डंप से नोटों के बंडल और खतरनाक आईईडी (IED) बनाने का सामान बरामद किया गया।

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नक्सलियों की आर्थिक रीढ़ पर प्रहार

बस्तर में सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव के कारण माओवादी अब अपने सुरक्षित ठिकानों को छोड़कर भागने पर मजबूर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में नकदी मिलना यह साबित करता है कि नक्सली संगठन अब अपने संसाधनों को सुरक्षित नहीं रख पा रहे हैं।

  • बरामद नकदी: लगभग 1 करोड़ रुपये (विभिन्न नोटों की शक्ल में)।

  • विस्फोटक: भारी मात्रा में गन पाउडर, जिलेटिन रॉड्स और डेटोनेटर।

  • अन्य सामग्री: नक्सली साहित्य, दवाइयां और दैनिक उपयोग का सामान।

बस्तर में सिमटता ‘लाल आतंक’

प्रशासन और पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बस्तर में अब लाल आतंक अपने अंतिम दौर में है। सरकार की ‘नियत नेल्लानार’ (आपका अच्छा गांव) योजना और सुरक्षा बलों के कैंपों के विस्तार ने माओवादियों के आधार को खत्म कर दिया है। अब उनके द्वारा सालों पहले छुपाए गए डंप एक-एक कर सुरक्षा बलों के हाथ लग रहे हैं।

“नक्सलियों के खिलाफ हमारा अभियान निरंतर जारी है। डंप की बरामदगी यह बताती है कि वे अब बैकफुट पर हैं। हम उनके आर्थिक और लॉजिस्टिक तंत्र को पूरी तरह ध्वस्त कर देंगे।” — वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, बस्तर रेंज

इलाके में अलर्ट जारी

इस बड़ी बरामदगी के बाद सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा और बढ़ा दी गई है। डीआरजी (DRG), एसटीएफ (STF) और आईटीबीपी (ITBP) के जवान लगातार जंगलों की खाक छान रहे हैं ताकि नक्सलियों के अन्य संभावित ठिकानों का पता लगाया जा सके।

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