मालदा बंधक कांड में NIA की बड़ी एंट्री, न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा पर देशभर में हड़कंप; आज पहुंचेगी टीम
मालदा/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) अभियान के दौरान 7 न्यायिक अधिकारियों को बंधक’ बनाए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने इस गंभीर घटना की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी NIA को सौंप दी है। केंद्रीय जांच दल आज (शुक्रवार) मालदा पहुंचेगा और अपनी जांच शुरू करेगा।
क्या है पूरा मामला?
1 अप्रैल को मालदा के कालियाचक इलाके में मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) का काम चल रहा था। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने कार्यालय को घेर लिया और 3 महिला अधिकारियों समेत कुल 7 न्यायिक अधिकारियों को बंधक बना लिया।
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वजह: ग्रामीणों का आरोप था कि मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं।
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स्थिति: प्रदर्शनकारियों ने कार्यालय के दोनों गेट बंद कर दिए थे, जिससे अधिकारी करीब 9-10 घंटे तक बिना भोजन और पानी के अंदर फंसे रहे।
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सुरक्षा चूक: सुरक्षा बलों की भारी कमी के बीच हजारों की भीड़ ने कार्यालय को घेर रखा था। अधिकारियों को देर रात करीब 1 बजे रेस्क्यू किया गया।
सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार: “यह जंगलराज है”
इस घटना पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार और पुलिस प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। चीफ जस्टिस ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह न्यायिक अधिकारियों के मनोबल को गिराने और चुनावी प्रक्रिया को बाधित करने की एक सोची-समझी कोशिश है। अदालत ने इसे “प्रशासन की पूर्ण विफलता” करार दिया।
चुनाव आयोग की कार्रवाई
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने एक आपातकालीन बैठक के बाद निम्नलिखित कदम उठाए हैं:
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NIA जांच: मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच NIA को सौंपी गई है। टीम 6 अप्रैल तक अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट को सौंपेगी।
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अफसरों पर गाज: मालदा के डीएम और एसपी को ड्यूटी में लापरवाही के लिए कड़ी फटकार लगाई गई है।
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सुरक्षा के निर्देश: चुनाव आयोग ने सभी न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा बढ़ाने और जरूरत पड़ने पर उनके परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने के निर्देश दिए हैं।
“राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है। हम न्यायिक अधिकारियों पर किसी भी प्रकार का मनोवैज्ञानिक हमला या हिंसा बर्दाश्त नहीं करेंगे।” > —















